فهد باشا

1ـ لو  اننا، فعلا، شعب  معافى،  في  هويته وعزته واخلاقه، لما  تراجع،  لحظة، عن  حقه  بكشف حساب يقدمه له سياسيوه، وقادة  طوائفه، وكل  من  تولى  مسؤولية رسمية  عامة، كشف حساباً مرفقاً ببيان يوضح من أين  لصاحبه  ما  له. أما  والشعب  قد  تخلى،  بالخضوع  والخنوع، ولا سيما احزابه، عن  هذا  الحق،  فالمعنى ان  الفساد جائحة  في الشعب  كما في ناهبيه. وعليه،  لا بأس من  الاعلان  عن  جنازة  من  دون  حداد، فاذ ذاك  لن يكون  هناك أحياء  لتقبل  العزاء. فالناس، اما  اموات  في  القبور واما اموات يدرجون.

2- تبقى  المعاني، في  الذهن، جميلة حتى  تلبس  ثوب  الكلمات. فان  لم  تكن  هذه  على  مقاس  تلك، ظهرت عورة  على  كلتيهما. فاجتناب العورة      بالحرص  على  لباس  قد  المقاس.

3- ليس  أقتل  للحب  بين رجل  وامرأة من أن يعتقد أحدهما بأن له الحق  بالحصول  على  صك  ملكية  بالاخر

4 - لا تتجدد الحياة في  شجرة  لا تعصف بها الرياح.